सोमवार, जुलाई 29, 2013

क्षमा / किस्मत (दो क्षणिकाएं)

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मृत्यु को जन्म देकर
ईश्वर अपराधी है
इतनी जोरों से जियें हम दोनों
कि इश्वर के अँधेरे को
क्षमा कर सकें !!! 

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उस अपंग बच्चे को 
गए हम फूल दे आये 
दरवाजे पर रूककर, पलटकर देखा 
मानो देहरी से निकल 
अपने देवता को
उसी की किस्मत पर
छोड़ आये !!! 

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---- प्रकाश गोविन्द 

7 टिप्‍पणियां:

  1. भावपूर्ण!
    सभी क्षणिकाएँ एक से बढ़कर एक हैं.

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  2. चित्र और क्षणिकाएँ एक दूसरे की पूरक लगीं.
    मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति.

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  3. शुभ प्रभात
    सम्पूर्ण सच को
    उकेर दिया
    आपने...
    अपना रचना में

    सादर

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  4. आह!!!
    बेहतरीन क्षणिकाएं....
    कोमल और हृदयस्पर्शी.....
    अनु

    जवाब देंहटाएं
  5. bhavpurn......prabhavi rachna.....sochne par majboor karti line

    जवाब देंहटाएं

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संवाद से दीवारें हटती हैं, ये ख़ामोशी तोडिये !!
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