शनिवार, सितंबर 05, 2015

अम्बानी की मेहमान नवाज़ी :-)

मुकेश अम्बानी के एक फैमिली फ्रेंड ने कहा :- 
"इसीलिए मैं मुकेश अम्बानी के घर नहीं जाता" 

एक बार मैं एंटीलिया गया,,,, नीता भाभी बोलीं--- 
"क्या लेंगे भाईसाहब, फ्रूट जूस...सोडा...चाय...कॉफी... हॉट चॉकलेट...इटैलियन चाय या फ्रोज़न कॉफी ?" 
उत्तर--- "चाय ले लूँगा, भाभी जी" 

प्रश्न--- "सीलोन टी...इन्डियन टी...हर्बल टी...बुश टी...हनी बुश टी...स्पेशल चाइना टी...कोरियन टी...
आइज्ड टी...या ग्रीन टी ?" 
उत्तर--- "जी, सीलोन टी" 

प्रश्न--- "भैंस का दूध...गाय का दूध या बकरी का या... ?" 
उत्तर--- "बस...बस...भाभीजी, गाय का दूध" 

प्रश्न--- "फ्रीजलैंड की गाय...आफ्रिकन गाय या...भारतीय गाय..या..?" 
उत्तर-- "रहने दीजिये भाभी जी, मुझे ब्लैक टी ही पिला दीजिये" 

प्रश्न--- "शक्कर के साथ...स्वीटनर....एस्पार्टम....शहद...या..?" 
उत्तर--- "जी, शक्कर के साथ" 

प्रश्न--- "बीट शुगर या कैन शुगर या...?" 
उत्तर--- "जी, कैन शुगर" 

प्रश्न--- "व्हाइट या ब्राउन शुगर या..?" 
उत्तर--- "अरे चाय को छोड़िये ना भाभी जी, आप तो बस एक गिलास पानी पिला दीजिए" 

प्रश्न--- "मिनरल वाटर...टेप वाटर...स्पर्कलिंग वाटर...या डिस्टिल्ड वाटर...या...?" 
उत्तर--- "मिनरल वाटर" 

प्रश्न--- "फ्लेवर्ड या नॉन फ्लेवर्ड...या..?" 
उत्तर---" जी....नॉन फ्लेवर्ड" 

प्रश्न--- "बिसलरी...एक्वाफिनो....हिमालयन...नीर....न्यासा....या......?" 
उत्तर---" माफ़ कीजिये भाभी जी, मुझे तो लगता है मैं, प्यास से ही मर जाऊँग" 

प्रश्न--- "आप कैसी मृत्यु चाहेंगे ? हमारे शेयर होल्डर होकर....या हमारे ऑथराइज्ड डीलर...
या सप्लायर.... या कस्टमर बनकर ....? " 


:-) :-) 
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मानसिक रोगी का परीक्षण :-)


एक मानसिक चिकित्सालय में एक पत्रकार ने डॉक्टर से प्रश्न किया :- 

"आप कैसे पहचानते हैं कि कौन मानसिक रोगी है और कौन नहीं ? " 

डॉक्टर -- "हम एक बाथटब को पानी से पूरा भर देते हैं और मरीज को, एक चम्मच एक गिलास और एक बाल्टी देकर कहते हैं कि वो बाथटब को खाली करे।" 

पत्रकार -- "अरे वाह, बहुत बढ़िया। यानी जो नार्मल व्यक्ति होता होगा वो बाल्टी का उपयोग करता होगा क्योंकि वो चम्मच और गिलास से बड़ी होती है" 

डॉक्टर ---" जी नहीं..... नार्मल व्यक्ति बाथटब में लगे हुए ड्रेन प्लग को खींच कर टब को खाली करता है। 
आप 39 नंबर के बैड पर जाइए ताकि हम आप की पूरी जाँच कर सकें। " 



[अगर आप ने भी बाल्टी ही सोचा था तो कृपया बैड नंबर 40 पर जाइए] 

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मंगलवार, मार्च 24, 2015

छोटे तिवारी और बोर्ड की परीक्षा :-)


[आजकल बोर्ड परीक्षा में नक़ल होने की बहुत चर्चा हो रही है ... 
 लीजिये पेश है हमारे दौर की एक सच्ची घटना] 
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कसबे में चारों तिवारी भाइयों ने दबंगई और मार-पीट में अभूतपूर्व ख्याति अर्जित की हुई थी ! कौन से नंबर का भाई ज्यादा खुराफाती है, ये शोध का विषय था ! 
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इस साल सबसे छोटे तिवारी का मूड हो आया कि बोर्ड का परीक्षा क्लियर करना है, बस तब क्या था ,,, बडकऊ तिवारी अगले रोज ही प्रधानाचार्य के कमरे में धमक पड़े - "गुरु जी इस साल छोटे को पास कराने की जिम्मेदारी आपकी है" 
-- 
प्रधानाचार्य बेचारे क्या करते ... वृन्दावन में रहना है तो राधे-राधे कहना है ... तत्काल चौबे और अस्थाना अध्यापक को बुलाया और समझा दिया - "कुछ करिए आप लोग" 
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अगले रोज पुलिस कर्मियों की सुरक्षा में बोर्ड की परीक्षा शुरू हुई ! पहला परचा हिंदी का था ... कक्ष में सारे छात्रों को प्रश्न-पत्र और कापियां वितरित कर दी गयीं .. छोटे तिवारी को जान-बूझकर सबसे पीछे कोने में बैठाया गया ! 
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दस-पंद्रह मिनट हुए थे कि चौबे जी एक कुंजी (उत्तर पुस्तिका) लेकर छोटे तिवारी के पास गए और बोले - "लो इसे रख लो और लिखना शुरू करो" 
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जरा देर बाद चौबे जी दोबारा पलटे ... तो देखा छोटे तिवारी घूर रहे हैं ! चौबे जी हडबडा गए, पूछा - "क्या हुआ ,,, इससे देखकर जवाब लिखते क्यूँ नहीं ?" 

छोटे तिवारी जोर से भुनभुनाए - "गुरूजी हमका आल्हा न सिखाओ ,,, चुप्पै ई बताओ कुंजी में कौन से पन्ने का क्या-क्या लिखना है ... पेन से निशान लगा के बतावौ ...." 
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:-) :-) :-)
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विशेष : आगे चलकर छोटे तिवारी दो बार विधायकी का चुनाव जीते !


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तलाश है ऐसे तीन लोगो की ...



एक लङकी थी रात को आँफिस से वापस लौट रही थी तो देर भी हो गई थी... पहली बार ऐसा हुआ और काम भी ज्यादा था तो टाइम का पता ही नही चला ! वो सीधे ऑटो स्टैंड पहुँची, वहाँ एक लङका खङा था ! वो लङकी उसे देखकर डर गई कि कही उल्टा सीधा ना हो जाए ! 
-- 
तभी वो लङका पास आया ओर कहा- "बहन तू मौका नही जिम्मेदारी है मेरी ओर जब तक तुझे कोई गाङी नही मिल जाती मैँ तुम्हे छोङकर कहीँ नही जाउँगा .. डोंट वरी" 
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वहाँ से एक ओटो वाला गुजर रहा था लङकी को अकेली लङके के साथ देखा तो तुरंत ओटो रोक दी ओर कहा- "कहाँ जाना है मैडम आइये मैं आपको छोङ देता हुँ" 
-- 
लङकी ओटो मे बैठ गई रास्ते मे वो ओटो वाला बोला- "तुम मेरी बेटी जैसी हो, इतनी रात को तुम्हे अकेला देखा तो ओटो रोक दी, आजकल जमाना खराब है ना और अकेली लङकी मौका नही जिम्मेदारी होती है" 
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लङकी जहाँ रहती थी वो एरिया आ चुका था, वो ओटो से उतर गई और ओटो वाला चला गया। लेकिन अब भी लङकी को दो अंधेरी गली से होकर गुजरना था, वहाँ से सिर्फ चलकर गुजरना था 
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तभी वहाँ से पानीपुरी वाला गुजर रहा था शायद वो भी काम से वापस घर की ओर गुजर रहा था .. लङकी को अकेली देखकर कहा- "आओ मैं तुम्हे घर तक छोङ देता हुँ" ... उसने अपने ठेले को वही छोङकर एक टार्च लेकर उस लङकी के साथ अंधेरी गली की और निकल पङा 

वो लङकी सही-सलामत घर पहुँच चुकी थी । 
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आज मेरे भारत को तलाश है ऐसे तीन लोगो की ... 
1) वो लङका जो बस स्टैंड पर खङा था 
2) वो ओटो वाला ओर 
3) वो पानीपुरी वाला 

जिस दिन ये तीन लोग मिल जाएगे उस दिन मेरे भारत में रेप होना बंद हो जाएंगे 
...और तभी आएंगे अच्छे दिन।।


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रविवार, मार्च 15, 2015

जब गाँधी और गोडसे मुस्कुराये

दिल्ली-मुम्बई राजधानी एक्प्रेस, डब्बा, प्रथम श्रेणी ! दो अपरचित लोग ! 
एक लड़का, एक लड़की आमने-सामने की सीट पर हाथों में किताब लिये बैठे हैं । 
दोनों चोर नजरों से एक-दूसरे के किताब के कवर को देख रहे हैं .. 

लड़का पढ़ रहा है- "माई एक्सपेरिमेंट विद ट्रुथ" 
लड़की पढ़ रही है- "मी नाथूराम गोडसे बोलतोय" 

तलब दोनों में है बात करने की ! किताबों की च्वाईस को लेकर, पर अपरचितों में पहल का इंतेजार रहता है। जैसा आमतौर पे होता है, बात होती है तो खूब होती है, पर ये नहीं कि तब गाँधी सही थे या गोडसे ! न तो गाँधी की महानता पर प्रश्न उठा, न गोडसे की अँधी देशभक्ति पर। 

फिर लड़का बोला- "वह गाँधी को इसलिए पढ़ रहा है कि गोडसे को समझ सके" 
यह सुनकर लड़की मुस्कुराई- मैं भी तो गोडसे को इसलिए पढ़ रही हूँ, ताकि गाँधी को समझ सकूँ। 

लड़की उसी तरह मुस्कुराकर फिर बोली- मैं गाँधी के पोते की पोती हूँ । 
लड़का मुस्कुराया, मुस्कुराहट में झिझक है, थोड़ा रुककर बोला- "मैं गोडसे के भाई का पोता हूँ।" 

राजधानी एक्प्रेस के उस डब्बे में इतिहास ठहर गया, उस दुर्लभ संयोग पर दोनों के विचार मुस्कुराये ! 
आँखें मुस्कुराई,, मन और मन के बीच प्रेम का अंकुर सरसराया ! 


और 
वहाँ ऊपर आसमान में गाँधी और गोडसे मुस्कुराये यह सोचकर 
 इन दो बच्चों के बहाने दुनिया में यह संदेश जायेगा कि - 

"नफरत स्थाई नहीं होती"


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End
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बुधवार, मार्च 11, 2015

खुली लूट मचा रखी है .... :-)


फोटोग्राफर ने उठते हुए टीचर से कहा - 
"तो एक ग्रुप फोटो का मैं 30 रुपये लूँगा आप मैनेज करके मुझे इन्फार्म कर देना, मैं आ जाऊँगा" 
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टीचर क्लास में - 
"सुनो बच्चों तुम लोगों का ग्रुप फोटो शूट होना है ... सब लोग अपने-अपने घर से पचास रुपये लेकर आना" 
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चिंटू अपने दोस्त से - 
 "ये सब टीचर लोगों की मिलीभगत होती है ! एक फोटो के 20 रुपया लगते हैं और हम लोगों से 50-50 रुपये लिए जा रहे हैं .... मतलब एक बच्चे से 30 रुपये बचायेंगे .. अकेले अपनी क्लास में 60 बच्चे हैं तो 60 x 30 = 1800 रुपये ... खुली लूट मचा रखी है इन लोगों ने" 
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चिंटू घर पर मम्मी से - 
"मम्मी स्कूल में ग्रुप फोटो शूट होने वाला है ... टीचर ने 100 रुपये मंगाए हैं" 

मम्मी - 100 रुपये ?? इन लोगों ने तो खुली लूट मचा रखी है ... रुक बेटा शाम को पापा से मांगूगी" 
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मम्मी रात को पापा से - 
 "अरे सुनते हो ~~ चिंटू के स्कूल में ग्रुप फोटो के लिए 200 रुपये मांगे गए हैं" 

पापा - "स्कूल वालों ने खुली लूट मचा रखी है .. जाओ पर्स से 200 निकाल लो"
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:-) :-) :-)

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मंगलवार, जनवरी 06, 2015

आई सी यू में अलौकिक शक्ति का रहस्य :-)

एक हॉस्पिटल के आई सी यू में 
हर रविवार 
एक ही बिस्तर पे ठीक 11 बजे 
एक मौत हो रही थी 
--- 
हर रविवार उसी बेड पर 
ठीक उसी समय हो रही मौत 
डॉक्टरों की समझ से परे थी, 
--- 
अंत में डॉक्टर ये मानने को मजबूर हो गए कि 
ज़रूर ये किसी अलौकिक शक्ति की वजह से हो रहा है 
--- 
--- 
मौत के कारण का पता लगाने के लिए 
विश्वस्तरीय डॉक्टरों की एक टीम गठित की गई , 
--- 
टीम को अगले रविवार का बेसब्री से इंतज़ार था 
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अगले रविवार सुबह 11 बजे से 
कुछ मिनट पहले ही सारे डॉक्टर और नर्स 
बेड के चारों ओर खड़े हो गए, 
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सब मौत का कारण जानने के लिए अत्यंत उत्सुक थे -
-- 
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11 बजने ही वाले थे कि 
.


 
तभी 
अचानक पार्ट टाइम स्वीपर 
I.C.U. में दाखिल होती है , 
और उस बेड के 
 लाइफ सपोर्ट सिस्टम का प्लग हटाकर 
अपना मोबाइल चार्ज पे लगा देती है 




:-) :-) :-) 
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The End 
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गजोधर को मिला जादुई चिराग :-)

एक बार गजोधर को एक चिराग मिला। 
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उसे ज़मीन पे घिसा तो एक जिन्न प्रकट हो गया 
और बोला :- आप मेरे आका हो, आपकी तीन wishes मैं पूरी करूँगा । 
--- 
--- 
गजोधर ने कुछ पल सोचा और बोला :- 

"पहली wish तो यह है कि दारू की एक ऐसी बोतल दो जिसमें दारू कभी खत्म न हो । 
--- 
जिन्न :- जो हुक्म मेरे आका ... और एक बोतल दे देता है । 
--- 
गजोधर को यकीन नहीं हुआ, वो चेक करने के लिए पीना शूरू करता है 
 और जैसे ही वो आखिरी पैग बनाता है बोतल फिर पूरी भर जाती है। 
--- 
जिन्न :- मेरा आका आप दो और wishes मांग सकते हो 
 --- 
गजोधर :- तू ऐसा कर जिन्न भाई...... ऐसी ही दो बोतलें और दे दे !!! 




:-) :-) :-)
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The End 
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रविवार, दिसंबर 28, 2014

लेडीज को सीट ऑफर :-)

एक साहब सुबह-सुबह ऑफिस जाने के लिए बस में चढ़े तो 
कंडक्टर ने मुस्कुराते हुए पूछा :– 

“कल रात ठीक-ठाक घर पहुँच गए थे सर ?” 
--- 
साहब: – “क्यों ? कल रात को मुझे क्या हुआ था ?” 
--- 
कंडक्टर – “टुन्न थे आप !” 
--- 
साहब (गुस्से से) :– “ये तुम कैसे कह सकते हो ? मैंने तो तुमसे बात तक नहीं की थी ?” 
--- 
कंडक्टर: – “ऐसा है सर जी, कल जब आप बस में बैठे हुए थे तो एक मैडम बस में चढीं थी और आपने उठकर उन्हें सीट ऑफर की थी !” 
--- 
साहब: – “तो ? लेडीज को सीट ऑफर करना गुनाह है क्या ???” 
--- 
--- 
कंडक्टर :– “गुनाह तो नहीं है सर, पर उस समय बस में केवल आप दो ही पैसेंजर थे !!!” 

:-)  :-)  :-)
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The End 
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शनिवार, दिसंबर 27, 2014

नज़रिए का फर्क

एक प्रख्यात लेखक अपने स्टडी रूम में बैठे थे। उन्होंने पेन उठाया और लिखना शुरू किया :- 

"पिछले वर्ष मेरा ऑपरेशन हुआ और गॉल ब्लॉडर निकल दिया गया, इसकी वजह से लम्बे समय तक मैं बिस्तर पर रहा। इसी साल मेरी उम्र 60 वर्ष की हो गयी और मुझे अपनी पसंदीदा जॉब छोड़नी पड़ी। मैंने अपने जीवन के 30 साल इस पब्लिशिंग कंपनी में बिताये। इसी वर्ष मुझे पिता जी की मौत के दर्द से भी मुझे गुजरना पड़ा … और इसी साल मेरा बेटा कार एक्सीडेंट की वजह से अपने मेडिकल इम्तिहान में भी फेल हो गया .... उसे कई दिनों तक हॉस्पिटल में रहना पड़ा। कार ख़राब हो गयी सो अलग।" 
 - 
अंत में उसने लिखा - "ओह ~~ ये बहुत ही ख़राब वर्ष रहा।" 
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लेखक अपने शोक में डूबा हुआ था, तभी उसकी पत्नी कमरे में आई। उसने पीछे खड़े होकर पति के लिखे विचारो को पढ़ा। वो चुपचाप कमरे से बाहर चली गई। थोड़ी देर बाद वो एक दूसरा पेपर ले कर आई और अपने पति द्वारा लिखे पेपर के बगल में रख दिया। 
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लेखक ने देखा कि उस पेपर में लिखा हुआ था :- 

"पिछले साल मुझे अपने गाल ब्लेडर से छुटकारा मिल गया, जिसकी वजह से इतने साल मैंने दर्द में गुजारे। बहुत अच्छे स्वास्थ्य के साथ मैंने 60 वर्ष पुरे किये और अपनी जॉब से रिटायर हो गया। अब मैं अपना समय और बेहतर लिखने में बिताऊंगा बताउगा। इसी वर्ष भगवान ने मेरे बेटे को नया जीवन प्रदान किया। मेरी गाड़ी जरूर बर्बाद हो गयी लेकिन मेरा बेटा बिना किसी अपंगता के सकुशल है। इसी साल मेरे पिता 85 वर्ष की आयु में बिना किसी पर निर्भर हुए भगवन के पास चले गए।" 

अंत में लिखा था - "भगवन के आशीर्वाद से भरा ये साल बहुत अच्छा बीता।" 
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देखा आपने ? 
एक ही घटना लेकिन नजरिया अलग अलग। 
अगर सकारात्मक सोच हो तो जीवन को बेहतर ढंग से जिया जा सकता है ! 

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The End
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कर्मचारी की शिकायत और मैनेजर का केलकुलेशन

दो वर्ष तक नौकरी करने के बाद एक व्यक्ति को समझ में आया कि इन दो सालों में न कोई प्रमोशन, ना ट्रांसफ़र, ना कोई तनख्वाह वृद्धि, और कम्पनी इस बारे में कुछ नहीं कर रही है.. 
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--- 
उसने फ़ैसला किया कि वह HR मैनेजर से मिलेगा और अपनी बात रखेगा... लंच टाईम में वह HR मैनेजर से मिला और उसने अपनी समस्या रखी.. 
--- 
HR मैनेजर बोला, मेरे बच्चे तुमने इस कम्पनी में एक दिन भी काम नहीं किया है... 

कर्मचारी भौंचक्का हो गया और बोला - ऐसा कैसे.. ? पिछले दो वर्ष से मैं यहाँ काम कर रहा हूँ.. 

HR मैनेजर बोला - देखो मैं समझाता हूँ... एक साल में कितने दिन होते हैं ? 

कर्मचारी - 365 या 366 

मैनेजर - एक दिन में कितने घंटे होते हैं ? 

कर्मचारी - 24 घंटे 

मैनेजर - तुम दिन में कितने घंटे काम करते हो ? 

कर्मचारी - सुबह 8.00 से शाम 4.00 तक, मतलब आठ घंटे.. 

मैनेजर - मतलब दिन का कितना भाग तुम काम करते हो ? 

कर्मचारी - (हिसाब लगाता है) 24/8= 3 एक तिहाई भाग 

मैनेजर - बहुत बढिया..अब साल भर के 366 दिनों का एक-तिहाई कितना होता है ? 

कर्मचारी - (???) 366/3 = 122 दिन.. 

मैनेजर - तुम "वीक-एण्ड" पर काम करते हो ? 

कर्मचारी - नहीं 

मैनेजर - साल भर में कितने वीक-एण्ड के दिन होते हैं ? 

कर्मचारी - 52 शनिवार और 52 रविवार, कुल 104 

मैनेजर - बढिया, अब 122 में से 104 गये तो कितने बचे ? 

कर्मचारी - 18 दिन 

मैनेजर - एक साल में दो सप्ताह की"सिक लीव" मैं तुम्हें देता हूँ, ठीक ? 

कर्मचारी - जी 

मैनेजर - 18 में से 14 गये, तो बचे 4 दिन, ठीक ? 

कर्मचारी - जी 

मैनेजर - क्या तुम मई दिवस पर काम करते हो ? 

कर्मचारी - नहीं.. 

मैनेजर - क्या तुम 15 अगस्त,26 जनवरी और 2 अक्टूबर को काम करते हो ? 

कर्मचारी - नहीं.. 

मैनेजर - जब तुमने एक दिन भी काम नहीं किया, फ़िर किस बात की शिकायत कर रहे हो भाई. 

:-)  :-)  :-)
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The End
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