सोमवार, जून 13, 2016

सत्यनारायण भगवान और मैं :-)


एक बार सत्यनारायण कथा की आरती का थाल मेरे सामने आने पर मैंने छाँट कर जेब में से कटा-फटा पाँच रुपये का नोट निकाला और कोई देखे नहीं, इस तरह आरती-थाल में डाला दिया। 
वहाँ अत्यधिक ठसाठस भीड़ थी। 
मेरे कंधे पर ठीक पीछे वाले सज्जन ने थपकी मार कर मेरी ओर 500 रुपये का नोट बढ़ाया। मैंने उनसे नोट ले कर आरती में डाल दिया। 
मुझे अपने मात्र 5 रुपये डालने पर थोड़ी लज्जा भी आई। 
बाहर निकलते समय मैंने उन सज्जन को श्रद्धा पूर्वक नमस्कार किया तब वो बोले - 

"बेटा .. जब तुम अपनी जेब से 5 रू का नोट निकाल रहे थे तो तुम्हारी जेब से 500 रु का नोट गिर गया था, जो कि उन्होंने मुझे वापस दिया था।" 
बोलो सत्यनारायण भगवान की जय ! 
.
:-) :-) :-)


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