शुक्रवार, जून 17, 2016

ये तो रियल हीरो है ...


बेंगलुरु के विनीत विजियन ने एमबीबीएस स्टूडेंट की स्टोरी शेयर की है।

विनीत विजयन नाम के शख्स ने फेसबुक पर लिखा है : - 'मैं बेंगलुरु मेडिकल कॉलेज के लिए ऑटो का इंतजार कर रहा था। दरअसल, वहां मेरे दोस्त की मां भर्ती थीं, जिन्हें मैं देखने जा रहा था। तभी एक ऑटो रुका। 
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मैंने आॅटो ड्राइवर से कहा- पीठ में दर्द है, आराम से चलना। उसने जवाब दिया, ठीक है सर। अमूमन ऐसा जवाब बेंगलुरु में आॅटो चालकों से सुनने को नहीं मिलता है। कुछ देर में ही मेडिकल कॉलेज पहुंच गया। 
मैंने उससे पूछा कि कितना किराया हुआ। वह सीट के पास लगे बॉक्स की ओर इशारा कर बोला, जो इच्छा हो सर, इसमें डाल दीजिए। 
कुछ देर तक तो मैं सोचता रहा, फिर डिब्बे को गौर से देखा तो उसके ऊपर लिखा था, गरीबों और जरूरतमंदों के लिए डोनेशन कीजिए। इस बीच देखा कि जो सिक्युरिटी गार्ड मेन गेट पर किसी की गाड़ी तक खड़ी नहीं होने देता। वो ड्राइवर को देखकर मुस्कुरा रहा है। फिर उससे बोलता है... नमस्कार सर। मुझे लगा शायद सिक्युरिटी गार्ड ड्राइवर के बारे में ज्यादा जानता है।'' 
मैंने कुछ पैसे डोनेशन बॉक्स में डाले और ड्राइवर ऑटो लेकर चला गया। मैंने गार्ड से उसके बारे में पूछा। पता चला कि आटो ड्राइवर लड़के के चार भाई-बहन हैं। पिता की मौत हो चुकी है, बड़ा भाई पैरालाइज्ड है और दो छोटी बहनें हैं। पिछले साल अच्छे मार्क्स से पास होने पर कॉलेज सुप्रिटेंडेंट ने उसे ऑटो गिफ्ट किया था। 
पहले महीने ही उसने ऑटो चलाकर कुछ पैसे बचा लिए और सुप्रिंटेंडेंट को देने चाहे पर उन्होंने इंकार कर दिया। इसके बाद से उसने मेडिकल कॉलेज आने वाले सभी पैसेंजरों को फ्री लाना शुरू कर दिया या कुछ पैसे बॉक्स में डालने को कहता है। महीने के आखिर में बचाए हुए पैसे मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने आए जरूरतमंदों पर खर्च करता है। 
मैं यह सब सुनकर चकित था...ये तो शहर का रियल हीरो है...भगवान उसकी मदद करे। 

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फेसबुक लिंक 
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1 टिप्पणी:

  1. ऐसे भी लोग हैं इस दुनिया में, वह भी हमारे देश में।हीरे जैसे इस हीरो को सलाम।

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