शनिवार, फ़रवरी 14, 2015

तेरा जाना ... (प्रेम दिवस पर)




कुछ महसूस हुआ था 
अपने हाथ में तुम्हारा हाथ लेने पर 
तुम खामोश थी और मै बेआवाज था . 

फासले अपना असर दिखा रहे थे 
फिर ट्रेन धीरे-धीरे स्टेशन से आगे बढती रही 
मैं वहां तक देखता रहा जब तक ट्रेन धुंधली न हो गयी . 

फिर धीमे क़दमों से वापस मुड़ गया 
अपने आसूँ पोछे तो दोनों हाथों को देखा 
अरे !! 
मेरे हाथों पर मुझे, 
तुम्हारी बेबसी के आँसू महसूस हुए थे 

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