
सहशिक्षा की नीति उचित है लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है शिक्षा ! यूपी बोर्ड की सहशिक्षा के पक्ष में सिफारिश के बाद शासन का असमंजस में पड़ना स्वाभाविक है ! हम इक्कीसवीं सदी में जी रहे हैं , अब हमें कदम आगे बढ़ाना होगा ! लड़कों और लड़कियों को अलग-अलग नहीं बल्कि साथ पढाना होगा, ताकि वे ज्यादा खुले माहौल में जीना सीखें ! उन्हें एक-दूसरे की समझ हो ! वो एक ही दुनिया के हिस्सा हैं इस बात का इल्म हो !
इन बातों के लिहाज़ से बोर्ड की सिफारिश अपनी जगह सही है लेकिन साथ ही कुछ और चीजों पर गौर करना भी उतना ही जरूरी है ! राज्य के सामाजिक ढाँचे को समझना होगा ! जहाँ लड़कियों के स्कूल में लड़कों का प्रवेश वर्जित हो , अगर वहां लड़के - लड़कियों को साथ पढाया गया तो कहीं लड़कियों की पढाई में ही बाधा न खड़ी हो जाए ! कहीं उनके स्कूल जाने पर ही रोक न लग जाए ! कस्बों और गाँवों का माहौल अभी भी लड़कियों की पढाई के पक्ष में ज्यादा नहीं है ! जब उन्हें पता चलेगा कि उनके घर की लड़की अब लड़कों के साथ पढाई करेगी तो बहुत मुमकिन है कि वे उनका स्कूल ही छुड़वा दें !
लड़कियों के लिए खुली हवा जितनी जरूरी है उससे कहीं ज्यादा जरूरी है कि वे शिक्षित और स्वावलंबी बनें ! सहशिक्षा शुरू करने से पहले उसके पक्ष में वातावरण बनाने की जरूरत है ! जरूरी है कि समाज उसे ज्यादा सकारात्मक नजरिये से देखे ! जब तक इस बात की संशय रहे कि सहशिक्षा लागू करने से लड़कियों के शिक्षित होने पर ही बाधा खड़ी हो सकती है तब तक सिर्फ़ शिक्षा पर ही ध्यान दिया जाए तो बेहतर होगा !
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13 प्रतिक्रियाएं:
सही कहा आपने !
अभी ग्रामीण समाज सह शिक्षा को स्वीकार करने की मानसिक स्थिति में नही है ! अभी सिर्फ़ शिक्षा पर ही ध्यान दिया जाना चाहिए !
- राजीव मिश्रा (सीतापुर)
बहुत महत्वपूर्ण बात उठायी है आपने !
देश की अनगिनत लड़कियां सिर्फ इसलिए शिक्षा से वंचित रह जाती हैं क्यूँ कि उनके घर के आस पास लड़कियों का स्कूल नही होता ! वाकई सह शिक्षा देने से ज्यादा जरूरी है लड़कियों को शिक्षित करना !
- भावना
you are hundred percent right sir.
सरकार की कोई भी नीति दूरगामी परिणाम सोचे बगैर होती है ,
एक तो इस देश में विशेषकर मुस्लिम समाज और देहातों में बालिकाओं की शिक्षा गैर जरूरी समझी जाती है , उस पर से सह शिक्षा की नीति और भी बाधक सिद्ध हो सकती है
अच्छा विषय उठाया है आपने !
सरकार को दूर द्रष्टि रखते हुए कोई कदम बढ़ाना चाहिए !
achcha likha hai aapne vishay v achchha hai. mere blog par aane k liye dhanywad aapne achchi kavita likhi.
sahi lagi aapki baat. sarkaar ko is baat pe avashy dhyaan dena chahiye ki koyi aisa step na le ladkyon ke vikaas ki raah me baadhak ho.
एक तो इस देश में पहले ही लड़कियों की शिक्षा गैर जरूरी समझी जाती है , उस पर से सरकार का यह निर्णय समझदारी वाला नही लगता .
sahi lagi aapki baat.
बहुत शानदार बात कही आपने !
रामराम !
I like your blog
बहुत शानदार बात कही आपने !
achhi bat kahi aap ne
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