निर्वात में गूंजती आवाज़ हूँ मैं ...
पुकार कर देखो मुझ को ...........

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आतंकवाद का महिमा मंडन कब तक ?

Monday, September 15

तंक का नंगा नाच जारी है कब कहाँ बम फट जाए कुछ नही कहा जा सकता आतंकवादी पूरे देश में खून की होली खेल रहे हैं जैसे ही कहीं बम फटता है मीडिया का पूरा लाव लश्कर वहां पहुँच जाता है उसके बाद टीवी के दर्जनों न्यूज़ चैनल दिन भर ज्यादा से ज्यादा कवरेज दिखाने की होड़ में लगे रहते हैं

यह
सही है कि देश के हर शहर में हर जगह 'सिक्योरिटी' नही रखी जा सकतीमानवता के दुश्मन दहशत फैलाने का रास्ता खोज ही लेंगे, लेकिन हमे अब आतंकवाद के मनोविज्ञान को समझना होगा
किसी भी बम विस्फोट में जब मासूम लोग मरते हैं, तो उन मरने वाले लोगों से आतंकवादियों की किसी तरह की व्यक्तिगत रंजिश नही होती है उनका सिर्फ़ एक ही मकसद होता है - दहशत फैला कर ज्यादा से ज्यादा 'पब्लिसिटी' हासिल करना यहाँ तक कि बम फटने के कुछ ही घंटे के अन्दर स्वयं ही - मेल करके अपनी पीठ ठोक लेते हैं.

किसी
भी तरह की आतंकवादी घटना होने पर प्रशासन अपना दायित्व और व्यवस्था
चाक
चौबंद रखे लेकिन मीडिया को अपना काम गभीरता से समझना होगा.
आतंकवाद
को 'ग्लेमराइस' करने की जरूरत नही है, अगर न्यूज़ पेपर और न्यूज़ चैनल
अपने
ऊपर संयम रखें तो आतंकवादियों मनोबल टूटेगा और उन्हें हताशा होगी.

12 प्रतिक्रियाएं:

Udan Tashtari ने कहा…

हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.

वर्ड वेरिपिकेशन हटा लें तो टिप्पणी करने में सुविधा होगी. बस एक निवेदन है.

Shastri ने कहा…

हिन्दी चिट्ठाजगत में इस नये चिट्ठे का एवं चिट्ठाकार का हार्दिक स्वागत है.

मेरी कामना है कि यह नया कदम जो आपने उठाया है वह एक बहुत दीर्घ, सफल, एवं आसमान को छूने वाली यात्रा निकले. यह भी मेरी कामना है कि आपके चिट्ठे द्वारा बहुत लोगों को प्रोत्साहन एवं प्रेरणा मिल सके.

हिन्दी चिट्ठाजगत एक स्नेही परिवार है एवं आपको चिट्ठाकारी में किसी भी तरह की मदद की जरूरत पडे तो बहुत से लोग आपकी मदद के लिये तत्पर मिलेंगे.

शुभाशिष !

-- शास्त्री (www.Sarathi.info)

Shastri ने कहा…

एक अनुरोध -- कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन का झंझट हटा दें. इससे आप जितना सोचते हैं उतना फायदा नहीं होता है, बल्कि समर्पित पाठकों/टिप्पणीकारों को अनावश्यक परेशानी होती है. हिन्दी के वरिष्ठ चिट्ठाकारों में कोई भी वर्ड वेरिफिकेशन का प्रयोग नहीं करता है, जो इस बात का सूचक है कि यह एक जरूरी बात नहीं है.

संजय तिवारी ने कहा…

ब्लाग की दुनिया में आपका स्वागत है. उम्मीद है और लोग आपके साथ जुड़ेंगे. और कम से कम दूसरी पोस्ट आप जरूर लिखेंगे.
फोटो बहुत जोरदार है.

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

स्वागत एक मसिजीवी का ‘माउस’जीवियों की जमात में...। आपका चिन्तन हिन्दी भाषा और समाज को और समृद्ध करे यही प्रार्थना है। शुभकामनाएं।

शोभा ने कहा…

बहुत अच्छा लिखा है. स्वागत है आपका.

शहरोज़ ने कहा…

इक बेचैनी है, इक छटपटाहट है आके अन्दर.
और इसे अभिव्यक्त करने का आपका प्रयास अच्छा है.
लिखना ही हमें आशा बंधाता है, इक नए सवेरे का.

कभी फ़ुर्सत मिले तो मेरे भी दिनरात देख लें.link है:

http://shahroz-ka-rachna-sansaar.blogspot.com
http://saajha-sarokaar.blogspot.com
http://hamzabaan.blogspot.com

anuj ने कहा…

बहुत सटीक लिखा है हिन्दी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है निरंतरता की चाहत है समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर भी दस्तक दें

बेनामी ने कहा…

बहुत सही कहा आपने |
ये ससुरा बम फटता तो एक बार है | लेकिन ये भूतनी के मीडिया वाले तीन दिन तक पूरे देश के सिर पर फोड़ते रहते हैं | कभी कभी तो लगता है कहीं मीडिया वाले इन आतंकवादियों के मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव तो नही हैं | जैसे ही कहीं बम फटा नहीं कि बस मीडिया की पौ बारह | कितने आतंकवादी थे .... कौन से संगठन के थे .... संगठन के प्रमुख पदाधिकारी कौन कौन लोग हैं ..... अब तक कहाँ कहाँ बम फोड़ चुके हैं .... उनकी आगे की प्लानिंग क्या क्या हो सकती है .... उनकी ट्रेनिंग कैसे होती है ........ बाप रे बाप पूरा साला बही खाता ही खोल के बैठ जाते हैं | अब जब इतना हीरो बनाओगे तो और क्या परिणाम होगा |

जय शंकर पटवर्धन
देहरादून

adil farsi ने कहा…

sateek likha ha aap ne aatnakwad par....badhai..

runescape money ने कहा…

i think the archive you wirte is very good, but i think it will be better if you can say more..hehe,love your blog,,,

superior ने कहा…

You these things, I have read twice, for me, this is a relatively rare phenomenon!
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