निर्वात में गूंजती आवाज़ हूँ मैं ...
पुकार कर देखो मुझ को ...........

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गेट वेल सून ..... राज मामू

Sunday, September 14




अभी जब चीन में ओलम्पिक हो रहा था तो भारत से काफ़ी लोग गए थे , जिसमे अनेक मीडिया कर्मी भी शामिल थे वहां भारतीय भोजन की काफ़ी दिक्कत थी, कुछ होशियार लोगों ने इन्टरनेट की मदद ली और वहां भी ऐसे दर्जनों रेस्ट्रोरेन्ट खोज निकाले जहाँ भारतीय भोजन मिलता था बड़े बड़े साईन बोर्ड में हिन्दी में इंडियन फ़ूड लिखा हुआ था अब जरा सोचिये जरा राज ठाकरे अगर चीन के निवासी होते तो उनको कितना अपमान महसूस हुआ होता ?

असल में कुछ लोगों का काम ही होता है हर बात में अपना अपमान खोजना मैग्नीफाइंग ग्लास लेकर बैठे रहते हैं कब उनको अपना अपमान दिखाई दे जाए ये तो अच्छा हुआ की तुलसीदास, कबीरदास, मीरा, प्रेमचंद, टैगोर,रजा राम मोहन राय, गाँधी वगैरह राज के शासन काल में नही हुए वरना राज ठाकरे की महाराष्ट्र नव निर्माण सेना ने हल्ला बोल दिया होता

मित्रों बात मजाक की नही है आज हमें सोचना होगा की इस मल्टीकलर देश में ऐसी कौन सी परिस्थितियां जवाबदेह हैं की अब्दुल बुखारी , सुभाष घीसिंग , भिंडडारवाला, राज ठाकरे जैसे खतरनाक अलगाव वादी वाइरस पनपते रहते हैं ? चाहे लादेन हो या राज ठाकरे ..... ऐसे लोग सिर्फ़ एक व्यक्ति नही होते ये लोग स्वयं में फैक्ट्री की तरह होते हैं जहाँ बहुतायत में अपनी जैसी दूषित विचारधारा वाले लोगों का उत्पादन करते रहते हैं इसलिए ऐसे घातक वाइरस पर जैसे भी हो तत्काल रोक लगानी आवश्यक है


4 प्रतिक्रियाएं:

बेनामी ने कहा…

sahi kaha aapne........ aise hi logon ne desh ki aisi taisi kar rakhi hai

From Rohit Verma

बेनामी ने कहा…

Jab Tak iss desh me vote ki raajniti chalti rahegi tab tak aise sirfire apna ek pair uthha kar jahan tahan pishaab karte rahenge......

Rahul ने कहा…

सही बात है !
देश में कुछ लोगों की दूकान इसी तरह चलती है ! ऐसे विघटनकारी और नफरत के बीज बोने वालों से सख्ती से निपटना चाहिए !

costume jewelry ने कहा…

i agree your idea ! very nice blog